शनिवार, सितंबर 08, 2007

स्टिंग ऑपरेशन का सच

स्कूली लड़कियों को जिस्मफरोशी के धंधे में धकेलने की बात स्टिंग ऑपरेशन में दिखाने पर दिल्ली सरकार ने उमा खुराना को बर्खास्त कर दिया। चैनल ने भी वाहवाही बटोरी लेकिन अब सच सामने आने लगा है। अब इस मामले में कुछ ऐसा नहीं बचा है जिसके आधार पर कहा जाए की स्टिंग में सच्‍चाई हो सकती है। स्टिंग करने वाले पत्रकार जेल में है। इस सब में शामिल लड़की भी जेल में है। बताया जा रहा है कि पहले भी कई मामले में उस लड़की का नाम उछलते रहा है। निर्भिक नाम से वह एक पत्रिका भी निकालती थी जिसमें नोएडा के दो बिल्‍डरों का पैसा लगा था।

स्टिंग की सच्‍चाई सामने आने के बाद कई सवाल उठ खड़े हुए हैं। पहला सवाल यह कि क्‍या इस प्रकार के स्टिंग ऑपरेशन से पत्रकारिता जगत में स्टिंग की विश्‍वसनीयता कितनी रह जाएगी ? दूसरा सवाल इस मामले में अगर कोई निर्दोष फंसता है तो सरकार और उस चैनल की क्‍या जिम्‍मेवारी बनती है ? तीसरा सवाल जो सबसे अहम है कि क्‍या इस प्रकार के स्टिंग ऑपरेशन को बढावा दिया जाना चाहिए ?

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