गुरुवार, सितंबर 13, 2007

रामायणकाल का नहीं है 'रामसेतु' !

पूरे देश में विश्‍व हिन्‍दू परिषद् और उसके सहयोगी संगठन ने चक्‍का जाम कर आम जनजीवन को प्रभावित कर दिया। सच्‍चाई चाहे जो हो राजनीति से परहेज नहीं है। देश की जनता को परेशान करना प्रमुख प्राथमिकता बनती जा रही है। देश का हित हो न हो अपना हित होना चाहिए।
भाजपा, विहिप और उनके सहयोगी संगठनों को चाहिए कि देश के प्रति अपने दायित्‍व को थोडी़ गंभीरता से लें। सिर्फ भावनाएं और अंधभक्ति को बढा़वा देने मात्र से राष्‍ट्रप्रेम नहीं पनप सकता। इसके लिए जरूरी है कि इसे एक वैज्ञानिक और तार्किक आधार भी मिलें। आखिर कब तक ये लोग धर्म के नाम पर अंधविश्‍वास को बढ़ावा देकर अपनी राजनीति चमकाते रहेंगे ? अगर अपने देश के प्रति उन्‍हें थोड़ी भी जिम्‍मेवारी का अहसास है तो रामसेतु मामले में जो वैज्ञानिकों ने रिपोर्ट तैयार की है उसका अध्‍ययन जरूर करें।
ताजा रिपोर्ट में जो तथ्‍य सामने आ रहे हैं उसके अनुसार भारत और श्रीलंका के बीच समुद्र के समाए ढ़ाचे के रामायणकालीन होने की संभावना कतई नहीं है। वैज्ञानिकों ने इस ढ़ांचे के नमूने उठाए हैं और जांच के बाद नतीजा निकाला है कि वह 600 से लेकर 1600 साल तक ही पुराने हैं। उसे रामायण काल का तभी माना जा सकता है जब वह छह हजार साल से ज्‍यादा पुराना हो। संसद में इस मुद्दे पर हंगामा होने के बाद केंद्र सरकार ने राष्‍ट्रीय समुद्र विज्ञान संस्‍थान चेन्‍नई के जरिये इस ढ़ांचे की गहन पड़ताल करवाई है।
राष्‍ट्रीय समुद्र विज्ञान संस्‍थान चेन्‍नई के वैज्ञानिकों के एक दल ने दो सप्‍ताह तक भारत और श्रीलंका के बीच बने इस ढांचे का गहन अध्‍ययन किया। वैज्ञानिकों ने पानी के नीचे बने तथाकथित रामसेतु के ढांचे में छेद करके चट्टान के कई नमूने उठाए। उसकी कार्बन डेटिंग की गई। इसका मकसद एक तो इस ढांचे की गहराई का आकलन करना था दूसरे चट्टान की आयु तय करना था। वैज्ञानिकों की रिपोर्ट के नतीजे कहते हैं कि इन नमूनों की जांच की है और यह 600 से लेकर 1600 साल तक पुराने निकले हैं। इसलिए इसके रामायणकाल में निर्मित होने की पुष्टि नहीं होती है।
इस ढांचा के बनने के बारे में वैज्ञानिकों ने जो थ्‍योरी पेश की है वह यह है‍ कि यह स्‍थान अरब सागर और बंगाल की खाड़ी के स्‍थान पर है। दोनों तरफ के सागरों के पानी के वेग के कारण संभवत: यह ढांचा निर्मित हुआ था। वैज्ञानिकों का तर्क है कि ऐसा होना आम बात है। गंगा-यमुना के संगम इलाहाबाद में भी पानी के नीचे इस तरह की चट्टानें बनी हुई हैं।

क्‍या है सेतु समुद्रम परियोजना ?
*भारत के पश्चिमी समुद्र तट के जहाजों को पूर्वी तट पर पहुंचने के लिए श्रीलंका का पूरा चक्‍कर काट कर पहुंचना होता है क्‍योंकि भारत और श्रीलंका के बीच समुद्र की गहराई कम है। यहां पानी में एक ढांचा है जिसके रामायण काल में निर्मित पुल होने के दावे किए जाते हैं। सेतु समुद्रम परियोजना के तहत इस ढांचे की खुदाई करके उसे जहाजों के आवागमन के लायक बनाया जाएगा।

*योजना के तहत भारत और श्रीलंका के बीच पानी के भीतर 167 किमी ढांचे की खुदाई कर उसे गहरा किया जाना है ताकि जहाज वहां से गुजर सकें।

*इस योजना पर 2500 करोड़ रुपये का खर्च आएगा। 2008 तक इस योजना के पूरा होने के बाद यहां से जहाजों का आवागमन शुरू होने की उम्‍मीद है।

*इसके बनने से वेस्‍ट और ईस्‍ट कोस्‍ट की दूरी 650 किमी (350 समुद्री मील) कम हो जाएगी जिससे जहाजों का ईंधन तो बचेगा ही, समय भी कम लगेगा। इतना ही नहीं इसके पूरा होने के बाद वेस्‍ट-ईस्‍ट कोस्‍ट के बीच 13 छोटे पोर्ट बनाने की भी योजना है।

*रोचक बात यह है कि 1860 में भी इस तरह की योजना का खाका बना था। लेकिन उस पर काम नहीं हो सका। इस परियोजना पर अध्‍ययन के लिए अब तक 14 एक्‍सपर्ट कमिटियां बनी हैं जिनमें 9 ब्रिटिशकाल में बनी हैं।

*भाजपा, विहिप जैसे संगठनों का कहना है कि राम सेतु के साथ लोगों की भावनाएं जुड़ी हुई है इसलिए इसके स्‍वरूप के साथ छेड़छाड़ नहीं की जानी चाहिए, जबकि श्रीलंका सरकार ने इसे समुद्री जीवों के लिए खतरनाक बताते हुए एक विशेषज्ञ समिति का गठन किया है।

क्‍या कर रही है भाजपा और विहिप?
भाजपा और विहिप बातों को संभालने के बदले भड़काने का काम कर रही है। 12 सितंबर को पूरे देश में सड़क जाम होने की खबर मिली। लाखों लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ा।

और अंत में-
सकता है विहिप और भाजपा इसे सफलता माने लेकिन सच्‍चाई तो यही है कि भाजपा, विहिप और उसके सहयोगी संगठन जो कि इस आंदोलन से जुड़े हैं वे सच्‍चाई को लोगों के सामने नहीं ला रहे हैं। इस परियोजना से समुद्री जीवों को कुछ नुकसान होगा लेकिन भाजपा और उसके सहयोगी दल अगर अपना रवैया नहीं बदलते हैं तो इससे देश और यहां के निवासियों का कुछ ज्‍यादा ही नुकसान होगा। एक बात तो तय है कि तथाकथित 'रामसेतु' आंदोलन से विहिप और भाजपा का कल्‍याण होने वाला नहीं है।

1 टिप्पणी:

Unknown ने कहा…

600 साल पहले जल मग्न हो गया था राम सेतु अेोर अ।प कह रहे हैं कि 600-1600साल पुराना है। अाज से 3000साल पहले तक भारत अोेर श्रीलंका के बीच इसि पुल से व्यापार होता था।