बुधवार, अक्तूबर 17, 2007

समाज को बाँटने की कोशिश

दो शब्‍द
पंजाब और हरियाणा की तरक्‍की में बिहार और उत्‍तर प्रेदश के लोगों का बहुत बड़ा योगदान है। इन राज्‍यों में खेती का काम हो या कारखाने का बिहार और उत्‍तर प्रदेश के लोग सबसे ज्‍यादा मिल जाएंगे। राज्‍य के विकास में इनके योगदान को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। कुछ चरमपंथी लोग जो कि राज्‍य के विकास के दुश्‍मन हैं, यह नहीं चाहते कि इस राज्‍य के लोग यहां रहे और काम करे। यह विस्‍फोट उन्‍हीं लोगों की करतूत लगती है।

अब खबर
लुधियाना के श्रृंगार हाल के विस्फोट में मरने वालों और घायलों में कोई भी पंजाब का नहीं था। ये थे बिहार और उत्तरप्रदेश के ऐसे लोग जो पंजाब जाते हैं मजदूरी करने। कुछ कमाई करने। घर से दूर रह रहे इन लोगों के लिए छोटी-मोटी कम कीमत वाली फ़िल्में ही मनोरंजन का साधन हैं, लेकिन रविवार को यह मनोरंजन उन्हें महँगा पड़ गया।श्रृंगार हाल में यूँ तो तीन फिल्में चल रही थीं, लेकिन जहाँ धमाका हुआ वहाँ चल रही थी भोजपुरी फिल्मों के सुपरस्टार रवि किशन और मनोज तिवारी की 'जनम जनम का साथ'। लेकिन अब इन धमाकों ने कम से कम छह लोगों को उनके परिवारजनों से जनमों के लिए अलग कर दिया है और कई लोगों को अपना जीवन बिना हाथ या बिना पैर या फिर किसी और विकलांगता के साथ बिताने के लिए मजबूर कर दिया है।अस्पताल में अपने घायल रिश्तेदार से मिलने का इंतजार कर रहे राजकिशोर कहते हैं कि मेरे दो भाई थे फिल्म देखने वालों में। सुरेश भाई तो ठीक हैं, कम चोट आई है लेकिन छोटे भाई हरिकेश का पैर काटना पड़ा है। बस जान बच गई यही बहुत है।
लुधियाना में पिछले 15 वर्षों से रह रहे किशन कुमार दुबे बताते हैं कि उनके दो पड़ोसियों को धमाके में चोटें लगी हैं, जिन्हें वो देखने आए हैं। फैजाबाद के रहने वाले किशोर लुधियाना में कपड़े की कताई-बुनाई की फैक्टरी में काम करने वाले लाखों मजदूरों में से एक है। उनके दो मित्र बच गए लेकिन एक को हाथ गँवाना पड़ा है।अस्पताल में घायलों के साथ एक भी महिला देखने को नहीं मिली। वो शायद इसलिए क्योंकि कपड़ों की कताई-बुनाई का काम करने वाले ये मजदूर परिवारों के साथ नहीं रहते। बिहार के मदन धमाके के शॉक से अभी उबर भी नहीं पाए थे। उन्होंने डॉक्टर की मदद से अपनी बात कही।मदन कहते हैं- हम तो पीछे बैठे थे, जहाँ धमाका हुआ। हम भागे जोर से और भागते-भागते अपने घर तक आ गए। घर पहुँचे तो देखे कि हमको बहुत चोट लगी है और खून निकल रहा है। खून देखकर हम बेहोश हो गए। हमको हमारे साथी लोग अस्पताल में लेकर आए। अब देखिए पैर और मुँह में चोट लगी है।शिवशंकर के पैर में चोट है लेकिन वो हिम्मत करके कहते हैं- अब क्या कर सकते हैं। जो होना था वो तो हो गया। कम से कम इलाज में पैसा नहीं लग रहा है नहीं तो हम मजदूर लोग कैसे इलाज करा पाते।रामबरन, मेहराज, विनोद, हरिकेस, सरोज, ताहिर, गणेश... ये तमाम नाम घायलों की सूची में लिखे हैं। किसी ने टाँग गँवाई तो किसी ने हाथ...मजदूरी के लिए उठने वाले ये हाथ-पैर आगे क्या करेंगे ये पूछने की हिम्मत न तो मुझमें थी न ही वो बता पा रहे थे।
कुछ लोगों का कहना था कि बिहार और यूपी के लोगों को जानबूझकर निशाना बनाया गया, लेकिन कई लोग ऐसा नहीं मानते हैं। स्थानीय निवासी जग्गी बताते हैं कि शहर की आधी से अधिक आबादी बिहार और यूपी के लोगों की है, जो यहाँ के कारखानों में, खेतों और तमाम व्यवसायों में काम करते हैं।निशाना : लुधियाना में बाहर से आए लोगों की आबादी बीस लाख से अधिक है, जो स्थानीय आबादी से कुछ ही कम है। ये लोग अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।स्थानीय पत्रकार मोहित श्रीवास्तव कहते हैं- देखिए पंजाब की अर्थव्यवस्था में बिहार और यूपी के लोगों का बड़ा हाथ है। यहाँ के कारखानों में यही लोग काम करते हैं। पंजाबी न तो अब खेतों में काम करता है और न ही कारखानों में। सोचिए अगर सारे यूपी, बिहार वाले वापस चले गए तो क्या होगा। ये बात पंजाब के लोग समझते हैं। उन्हें भी अपना काम कराना है।लेकिन क्या ये धमाके बिहार और यूपी के लोगों को निशाना बना कर नहीं किए गए, वो कहते हैं कि बिलकुल ऐसा हो सकता है कि चरमपंथी तत्वों ने बिहार और यूपी के लोगों को निशाना बनाकर एक वैमनस्य का संदेश देने की कोशिश की है, लेकिन इससे वैमनस्य बढ़ेगा, ऐसा मुझे नहीं दिखता।
उल्लेखनीय है कि चरमपंथ के चरम काल में उग्रवादियों ने ऐसी कोशिश की थी कि बिहार और यूपी के लोग पंजाब छोड़कर वापस चले जाएँ लेकिन शायद दोनों पक्षों यानी पंजाब के धनाढ्य वर्ग और बिहार, यूपी के मज़दूर एक दूसरे की जरूरत बन चुके हैं। इसलिए ऐसा हुआ नहीं।
विशेषज्ञों का कहना है कि इन धमाकों के जरिये चरमपंथियों ने न केवल आतंक फैलाने की कोशिश की है बल्कि समाज को बाँटने की भी कोशिश की है।समाज कितना बँटेगा ये कहना जल्दबाजी होगी, लेकिन एक बात तय है कि आने वाले दिनों में बिहार और यूपी के मज़दूर थोड़ा डर कर, थोड़ा सहम कर और अत्यधिक चौकस रह कर ही काम कर पाएँगे।

साभार: बीबीसी और वेब दुनिया

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